यह कैसा माघ मेला,पहले दिन ही मेले के आयोजन पर विरोध व विवाद

यह कैसा माघ मेला,पहले दिन ही मेले के आयोजन पर विरोध व विवाद

- in Uttarkashi
266
0

 

संतोष साह / उत्तरकाशी

उत्तरकाशी का माघ मेला धार्मिक और सांस्कृतिक का प्रतीक माना जाता है। यह मेला एक तरह से सभी को एक साथ लाने और मकर संक्रांति के दिन उत्तरकाशी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान मे देवताओं के आशीर्वाद लेने को लेकर भी कही अधिक विशेष माना जाता है। लेकिन इस बार के मेले के आयोजन मे देव डोलियों के आने से पहले ही पंडाल का जो नजारा था और उसमें राजनीति की जो सुर्खियां बनी उसने मेला आयोजन पर ही सवाल खड़े कर दिये। फिर क्या था मेले का उद्घाटन ही चर्चाओं में आ गया। जिले की पुरोला विधानसभा से कांग्रेस के विधायक राज कुमार मेला अतिथि पंडाल से उठकर चले गए। उन्होंने मेले का बहिष्कार किया और भाजपा सरकार पर बरसे। उन्होंने मेले के विरोध की बात इस लिए की कि उनको मेले के उद्घाटन पर नजर अंदाज किया गया। मेले के पोस्टरों मे उन्हें गायब किया गया। पंडाल से निकलकर जिस तरह से उन्होंने जिला पंचायत पर निशाना साधा उससे साफ होता है कि मेले के आयोजन को लेकर कहीं न कही राजनीति हावी हुई है। मेला जिला पंचायत आयोजित करती है। जिला पंचायत अध्यक्ष भाजपा से तालुक रखती है मगर सत्ता पक्ष की गैरमौजूदगी भी इस मेले पर कही न कही सवाल उठाती है। सबसे बड़ा सवाल की यदि स्थानीय विधायक पारिवारिक शोक के कारण इस मेले में न आ पाए तो यमुनोत्री विधायक क्यो नहीं पहुचे। लगभग हर साल इस मेले के शुभारंभ पर बतौर मुख्य अतिथि या तो मुख्यमंत्री या फिर सरकार से कोई टॉप मंत्री मेले में मुख्य अतिथि हुआ करते थे लेकिन ऐसा क्या हो गया कि इस बार गैरमौजूदगी रही। मेले में जिले के डीएम समेत आलाअफसरों की गैर मौजूदगी भी कहीं न कही मेले के उद्घाटन पर सवाल खड़े करती है। मेला व्यक्ति

मेला पोस्टर इस पर भी विवाद हुआ

विशेष का नहीं बल्कि जनता का होता है लेकिन इस बार कहीं नही लगा कि मेले का पंडाल जनता का है। मेले में मेले के पोस्टर पर भी उंगलियां उठी। भाजपामय पोस्टर की जब बात हो रही थी तब अतिथि पंडाल कांग्रेसमय लग रहा था लेकिन जब रिबन काटने,फूलमालाएं चढ़ाने की बारी आई तो कांग्रेसी बौखला गए। अपनी बेइज्जती महसूस होते देख कांग्रेसी पंडाल से बाहर निकल आये। जनता के सामने उन्होंने तब आयोजको की पोल खोलना ही मुनासिब समझा औऱ अपना विरोध दर्ज किया। सबसे बड़ा सवाल की मेले के उदघाटन के पहले दिन जिस तरह से मेले पर सवाल उठे हैं वे बताते हैं कि मेले को राजनीतिक स्वरूप दिया जाना मेले की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत औऱ भावनाओं के लिए ठीक नहीं है। मेला जनता का है और इसे जनता को मनाने दिया जाय तो बेहतर होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

उत्तरकाशी : गंगा दशहरा पर्व पर गंगोत्री धाम में हजारों की संख्या में पहुंचे यात्री, स्थानीय देव डोलियां भी हुई शामिल

  संतोष साह / उत्तरकाशी आज का दिन