20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने का भी है वैज्ञानिक कारण

20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने का भी है वैज्ञानिक कारण

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विशाल भटनागर

*20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोने का वैज्ञानिक कारण*

रसायन विज्ञान की दृष्टि से
कोरोना वायरस एक राइबोन्यूक्लीक वायरस है।
राइबोन्यूक्लीक अम्ल एक जेनेटिक मटेरियल है जो मनुष्य की डी एन ए के साथ मिलकर खुद की द्विगुणित कर नए वायरस उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।

कोरोना वायरस में राइबोनन्यूक्लीक अम्ल के चारो ओर लेपोप्रोटीन का खोल होता है। लिपोप्रोटीन के दो कम्पोनेंट होते हैं लिपिड अर्थात फैट और प्रोटीन।

लिपोप्रोटीन जल में नहीं घुलती इसलिए कोरोना वायरस श्वांस तंत्र में जीवित रहता है।

साबुन रासायनिक रूप से उच्च वासा अम्लों ( फैटी एसिड) के धातु ( सोडियम या पोटैशियम ) साल्ट होते हैं।

साबुन के अणु जलीय विलयन में मिसल के रूप में रहते हैं जिससे इनकी सरफेस बहुत बढ़ जाती है तथा वायरस को आकर्षित करती है। मिसल की ऊपरी सतह आयनिक तथा जल आकर्षित (हाइड्रोफिलिक) करती है जबकि अंदरूनी श्रृंखलाएं हाइड्रोकार्बन की चेन होती हैं जो जल विरोधी ( हाइड्रोफोबिक) लेकिन लिपिड या फैट को घोल देती हैं। इस प्रकार वायरस की लिपिड को सुरक्षित कॉटिंग साबुन की मिसल में फंस कर फट जाती है और आर एन ए बाहर आ जाता है और वायरस मर जाता है। इस प्रक्रिया में 20 सेकंड का समय लगता है इसलिए हमें साबुन के घोल के साथ अपने हाथों को अच्छी तरह 20 सेकंड तक धोना चाहिए।

डॉ0 अजय बाबू शर्मा
रसायन विज्ञान विभाग
विजय सिंह पथिक
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय , कैराना ( शामली)

 

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