होली खेलो प्राकृतिक रँगों से कैमिकल से नही।

होली खेलो प्राकृतिक रँगों से कैमिकल से नही।

डॉ रणवीर सिंह वर्मा
सनसनी सुराग न्यूज
जनपद शामली

प्राचीन काल में टेशू के फूलों से तैयार सात्विक रंग अथवा गुलाल, कुमकुम, हल्दी से होली खेली जाती थी । लेकिन आज के परिवर्तन-प्रधान युग में अनेक प्रकार के रासायनिक तत्त्वों से बने पक्के रंगो का तथा कई स्थानों पर तो वार्निश, आईलपेंट व चमकीले पेंटो का भी होली खेलने में उपयोग किया जाता है । होली खेलते समय निम्नलिखित सावधानियाँ बरतने से आप हानिकारक रसायन युक्त रंगों के दुष्प्रभाव से बच सकते है :

१) सावधानी रखिये कि कही होली का रंग आँख या मुँह में न चला जाय अन्यथा आँखों की ज्योति अथवा फेफड़ों व आँतो में हानि पहुँचा सकता है । अत: जब कोई रंग लगाये तब मुँह व आँखे बंद रखिये ।

२) रंग खेलने से पहले ही अपने शरीर पर नारियल, सरसों अथवा खाद्य तेल की अच्छी तरह से मालिश कर लीजिये ताकि त्वचा पर पक्के रंगों का प्रभाव न पड़े और साबुन लगाने मात्र से ही वे रंग निकल जायें । अपने बालों में भी तेल की अच्छी तरह से मालिश कर लीजिये ताकि रासायनिक रंगो का सिर पर कोई प्रभाव न पड़े । इसप्रकार की मालिश के आभाव में रासायनिक रंग त्वचा पर गहरा प्रभाव छोड़ते है तथा त्वचा में कुछ दिनों तक जलन एवं शुष्कता बनी रहती है ।

३) जो लोग होली खेलने में वार्निश, आईलपेंट या अन्य किसीप्रकार के चमकदार पेंट का उपयोग करते हैं, ऐसे लोगो से सावधान रहिये । भूलकर भी उस टोली में शामिल न होइये, जिसमें इसप्रकार के घातक पदार्थो से होली खेली जाती हो । ये रंग चेहरे की त्वचा के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित हुए है । कभी-कभी तो पूरा चेहरा ही काला या दागदार बन जाता है । यदि कोई आप पर ऐसा रंग जबरन लगा भी दे तो तुरंत ही घर पहुँचकर रुई के फाहे को मिटटी के तेल में डुबोकर उससे धीरे-धीरे रंग साफ़ कर लीजिये । फिर साबुन लगाकर चेहरा धो डालिये ।

४) त्वचा पर लगे पक्के रंग को बेसन, आटा, दूध, हल्दी व तेल के मिश्रण से बना उबटन बार-बार लगाकर एवं उतारकर साफ़ किया जा सकता है । यदि उबटन के पूर्व उस स्थान को नींबू से रगड़कर साफ़ कर लिया जाय तो और भी लाभ होगा । नाखूनों के आस-पास की त्वचा में जमे रंग को भी नींबू द्वारा घिसकर साफ़ किया जा सकता है ।

५) रंग घर के बजाय बरामदे में या सडक पर ही खेले ताकि घर के भीतर रखी वस्तुओं पर उनका दुष्प्रभाव न पड़े ।

६) होली खेलते समय फटे या घिसे हुए पतले वस्त्र न पहने ताकि किसी भी प्रकार की लज्जाजनक स्थिति का सामना न करना पड़े ।

७) होली के अवसर पर देहातो में भाँग व शहरों में शराब पीने का अत्यधिक प्रचलन है । पर नशे के मद में चूर होकर व्यक्ति विवेकहीन पशुओं जैसे कृत्य करने लगता है । क्योंकि नशा मस्तिष्क से विवेक का नियंत्रण हटा देता है, बुद्धि में उचित निर्णय लेने की क्षमता का ह्रास कर देता है और वह मन, वचन व कर्म से अनेक प्रकार के असामाजिक कार्य कर बैठता है । अत: इस पर्व पर सभी प्रकार के नशों से सावधान रहें ।

८) शिष्टता व संयम का पालन करें । भाई सिर्फ भाइयों की टोली में व बहनें सिर्फ बहनों की ही टोली में होली मनाये । बहनें घर के परिसर में ही होली मना लें तो और भी अच्छा है ताकि दुष्ट प्रवृति के लोगो की कुदृष्टि उन पर न पड़े ।

९) जो लोग कीचड़-गंदगी जैसे दूषित पदार्थो से होली खेलते है, वे खुद तो अपवित्र होते ही है, औरों को भी अपवित्र करने का पाप अपने सर पर चढाते है। अत:गंदे कीचड़ आदि का प्रयोग न करें ।

१०) रंग खेलते समय शरीर पर गहने आधी कीमती चीजें धारण न करें, अन्यथा भीड़ में उनके चोरी या गुम हो जाने की संभावना बनी रहती है।होली खेलते समय मन में कोई दुर्भावना न रखें, कोई पुरानी रंजिश मन में न रखें।इससे होली की मर्यादा भंग होती है।

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