महायोगी की महासमाधि के पांच वर्ष

महायोगी की महासमाधि के पांच वर्ष

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सतीश सेठी /ब्यूरोचीफ /सहारनपुर /सनसनीसुराग न्यूज़
महायोगी की महासमाधि के पांच वर्ष
आश्रम का कहना है गुरु समाधि में हैं और निश्चित लौटेंगे
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक और संचालक आशुतोष महाराज की समाधि के २८ जनवरी को पूरे 5 वर्ष हो चुके हैं। आज से 5 वर्ष पूर्व आधी रात को उन्होंने समाधि ली थी। यह खबर सुबह होते होते आग की तरह फैल गई थी। यह समाधि आशुतोष महाराज ने पंजाब के नूर महल में स्थित अपने आश्रम में ली थी। उनके भक्तों को आश्रम के माध्यम से या न्यूज चैनलों के माध्यम से आशुतोष महाराज के समाधि का ज्ञान हुआ। आश्रम में भक्तों का तांता लगने लगा लोग आंखों में आसूं लिए पंजाब के नूर महल में स्थित आश्रम पहुंचने लगे। यही हाल समूचे देश के आश्रमों का था। संस्थान के पूरे भारत में सैकड़ों आश्रम हैं और करोड़ों भक्त। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया उनको मृत घोषित करने पर तुला था वहीं महाराज के आश्रम के समर्पित शिष्य एवं उनकी संगत को पूर्ण विश्वास था कि उनके गुरुदेव ने समाधि ली है। वह समय आम चुनावों का था पर महाराज के समाधि में जाने की खबर ऐसी थी जिसने राजनीतिक खबरों को भी पछाड़ दिया था। उस वक्त के तमाम न्यूज चैनल उनकी समाधि पर डिबेट करने लगे। सभी चैनलों के प्राइमटाइम की बहस का प्रमुख विषय यह था कि आशुतोष महाराज मृत हैं या समाधि में। हिंदू धर्म के तमाम मठों के संत और संन्यासी ने अपने-अपने अनुभव और अध्ययन के हिसाब से फैसला सुनाने लगे वह समाधि में हैं या मृत। एक तरह से संत समाज इस विषय पर विभक्त हो चुका था। वहीं विज्ञान अपनी कसौटी पर इसे समाधि स्वीकार नहीं कर रहा था। कुल मिलाकर यह एक ऐसा विषय बन गया बन गया था जो समूचे देश में चर्चा का विषय था। वहीं दूसरी और उनके भक्त इन सभी विवादों से दूर आश्रम में ध्यान में बैठे थे। आश्रम ने स्पष्ट कर दिया कि मीडिया या विज्ञान को जो कहना है कहे वो कहने के लिए स्वतंत्र है पर उनके गुरु समाधि में है और वह निश्चित लौटेंगे। उनके समर्पित शिष्य और संगत का जवाब स्पष्ट था कि उनके गुरुदेव ने प्रारंभ से उनको अपनी समाधि के विषय में समय-समय पर आगाह करते रहे हैं और वह अपने दिव्य अनुभवों के माध्यम से आम संगत और साधकों को अपनी भविष्य में ली जाने वाली इस समाधि का बोध करवाते रहे हैं। जहां उन्होंने अपनी समाधि से वापसी का भी ज्ञान कराया है। संस्थान के फैसले के बाद उनके दिव्य शरीर को उनके पंजाब के नूरमहल स्थित आश्रम में वैज्ञानिक तरीके से रखा गया है। उनके संस्थान के प्रचारकों का कहना है कि उनके दिव्य शरीर को उस तापमान पर रखा है जिस तापमान पर महायोगी दूर पहाड़ी पर समाधि में बैठते हैं।

दिलीप झा ने किया था पुत्र होने का दावा
अभी संस्थान शांतिपूर्वक चल रहा था कि खबर आती है कि दिलीप झा नामक व्यक्ति ने महाराज के शरीर पर दावा करते हुए खुद को उनका पुत्र कहा है और उनके अंतिम संस्कार की मांग की है। साथ ही उसने यह आरोप लगाया कि आशुतोष महाराज समाधि में नहीं है और उनकी हत्या की गई है। फिर क्या था महाराज की समाधि फिर चर्चा का विषय बन गई। सभी न्यूज चैनल पर दिलीप झा, उसका गाँव, उसके रिश्तेदार उसके यार, दोस्त सभी नजर आने लगे। पर हैरानी की एक बात ये थी कि उसका कोई रिश्तेदार तो दूर उसके गांव और आसपास के गांव में भी एक ऐसा बुजुर्ग नहीं मिला जो यह कह दे कि उसने दिलीप झा की मां और आशुतोष महाराज का विवाह देखा हो।

सामाजिक कार्यों में लगा है दिव्य ज्योति जागृति संस्थान
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान करीब तीन दशकों से समाज में धर्म के प्रचार प्रसार में संलग्न है। संस्थान में इस वक्त सैकड़ों की तादाद में पढ़े लिखे साधक-साधिका हैं जिन्होंने अपना जीवन मानवता को समर्पित कर दिया है। संस्थान के ना सिर्फ संपूर्ण देश में अपितु विश्व के विभिन्न देशों में आश्रम है, जिनके माध्यम से संस्थान धर्म का प्रचार प्रसार कर रहा है। संस्थान ना सिर्फ धार्मिक कार्यों में संलग्न है अपितु कई सामाजिक प्रकल्प भी चला रहा है। जैसे कामधेनु, गौ संरक्षण और संवर्धन के लिए, अंतर्दृष्टि- नेत्रहीनों को स्वालंबी बनाने के लिए। युवाओं में बड़ते नशे के चलन को देखते हुए संस्थान ने बोध के नाम से प्रकल्प चलाया हुआ है। जिसके माध्यम से वी न सिर्फ युवाओं को नशे भयावह नुकसान के प्रति जागरूक करते हैं, वो नशे में लिप्त युवाओं का नशा भी छुड़ाते हैं। कुल मिलाकर संस्थान आशुतोष महाराज के बताए हुए मार्ग पर आज भी पूर्ण निष्ठा और विश्वास के साथ चल रहा है। महासमाधि के पांच वर्ष बाद भी उनके समर्पित शिष्यों और उनकी संगत का विश्वास चट्टान की तरह अडिग है कि महाराज अपनी महासमाधि से शीघ्र लौटेंगे और विश्व के शांति के लक्ष्य को पूरा करेंगे।
कोर्ट ने कहा, धार्मिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा
खैर जो भी हो मामला न्यायालय तक पहुंचा। न्यायालय ने दिलीप झा को उसकी संतान तो नहीं माना पर संस्थान को आशुतोष महाराज के अंतिम संस्कार का आदेश दे दिया। यह फैसला संस्थान पर वज्र की तरह पड़ा। एक बात माननी पड़ेगी, सभी टीवी चैनल हो या संस्थान की संगत से पृथक जनमानस को यही लगा कि जैसे रामपाल के भक्तों ने अपने आश्रम में आई पुलिस फोर्स पर हथियारों से हमला कर दिया था, जोकि रामपाल को विभिन्न आपराधिक मामलों पर गिरफ्तार करने आई थी और सभी चैनलों ने उसको लाइव दिखाया था, ऐसा ही कुछ दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के अनुयायियों द्वारा भी किया जाएगा, वो भी कोर्ट की अवमानना करेंगे। उसके लिए गैरकानूनी रास्ता अख्तियार करेंगे पर हुआ उसका बिल्कुल विपरीत। संस्थान के समर्पित प्रचारक और संगत शांति का प्रदर्शन करते हुए ध्यान भजन में ही लगे रहे। संस्थान से कोर्ट के फैसले पर पूछे जाने पर उन्होंने यही कहा कि इसके विरुद्ध कोई गैरकानूनी तरीका इस्तेमाल नहीं करेंगे और बड़ी बेंच में अपील करेंगे। उन्होंने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि उनके गुरु ने उनको ऐसी शिक्षा कभी नहीं दी जो राष्ट्र के कानून और संविधान का विरोध करना सिखाए। हमें पूर्ण विश्वास है कि हम बड़ी बेंच फैसले पर स्थगन प्रस्ताव ले आएंगे। और हुआ भी कुछ ऐसा ही, पंजाब चंडीगढ़ उच्च न्यायालय ने पूर्व के फैसले पर रोक लगा दी। अब मामला डबल बेंच पर चलने लगा जहां दिलीप झा ने फिर से अपील की। यह मामला डबल बेंच में करीब 2 साल से ज्यादा समय तक चला और फिर 5 जुलाई 2017 को संस्थान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने यह कहा कि वह संस्थान के धार्मिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी और जो भी स्थिति इस वक्त है उसे वैसा ही रखा जाए। किंतु साथ में उसने यह भी निर्देश दिया कि शरीर का समय-समय पर निरीक्षण करना होगा। दिलीप झा भी खुद को बेंच के सामने आशुतोष महाराज का पुत्र सिद्ध ना कर सका।

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