भगवान महावीर स्वामी ने समाज को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया

भगवान महावीर स्वामी ने समाज को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया

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सनसनी सुराग न्यूज
कांधला जनपद शामली

नीरज जैन/डॉ0 रणवीर सिंह वर्मा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन जैन समाज के चौबीस तीर्थकरों में अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म हुआ था। भगवान महावीर ने पूरे समाज को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाया।
भगवान महावीर का जन्म बिहार में लिच्छिवी वंश के महाराज और मां त्रिशला देवी के यहां हुआ था। भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। वर्धमान ने ज्ञान की प्राप्ति के लिए महज तीस साल की उम्र में राजमहल का सुख और वैभव जीवन का त्यागकर, तपोमय साधना का रास्ता अपना लिया था। उनका वह साढ़े बारह वर्षों की साधना व उनके जीवन कष्टों का जीवंत इतिहास है। इसलिए उन्हें महावीर के नाम से पुकारा गया।
अहिंसा
भगवान महावीर ने हमेशा से ही दुनिया को अहिंसा और अपरिग्रह का संदिश दिया है। उन्होंने जीवों से प्रेम और प्रकृति के नजदीक रहने को कहा है। महावीर ने कहा है कि अगर किसी को हमारी मदद की आवश्यकता है और हम उसकी मदद करने में सक्षम हैं फिर हम उसकी सहायता ना करें तो यह भी एक हिंसा माना जाता है।

 


तीर्थंकर
भगवान महावीर ने अपने हर भक्त को अहिंसा के साथ, सत्य, अचौर्य, बह्मचर्य और अपरिग्रह के पांच व्रतों का पालन करना आवश्यक बताया है। साथ ही उन्होंने साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका- इन चार तीर्थों की स्थापना की। इसलिए वह तीर्थंकर भी कहलाए।

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