जांबाज पुलिस अधिकारियों में अपना शुमार रखते हैं मु0नगर पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर सिद्धार्थ तोमर

जांबाज पुलिस अधिकारियों में अपना शुमार रखते हैं मु0नगर पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर सिद्धार्थ तोमर

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*एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और जांबाज पुलिस अधिकारियों में अपना सुमार रखते हैं पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर सिद्धार्थ तोमर*

*बेहतरीन कार्यप्रणाली तथा एनकाउंटर शैली से प्रभावित होकर दो बार मिलने आ चुके मुम्बई के दया नायक*

*तस्लीम बेनकाब*

बेनकाब अपराधी समाचार

मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर में सी ओ सदर के पद पर तैनात सिद्धार्थ तोमर काफी तेजतरार और जांबाज अधिकारियों में अपना शुमार रखते हैं यदि इनकी पूर्व की सर्विस का आकलन किया जाए तो ज्ञात होता है कि इनकी पूरी पुलिस नौकरी कर्तव्य निष्ठा ईमानदारी तथा बहादुरी से भरी हुई है इन्होंने लखनऊ में चौकी इंचार्ज रहते हुए 1998 में 4 शातिर इनामी बदमाशों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया था जिसमें एक शातिर इनामी बदमाश एक लखिया भी शामिल था जो अपने आप में उस समय में एक बड़ी उपलब्धि मानी गई थी लखनऊ में इनके जलवे देखते ही बनते थे तथा एक एनकाउंटर विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान रखते थे बाद में इस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत होने के बाद कई जिलों में थाना प्रभारी रहे तथा एसटीएफ विजिलेंस सहित कई विभागों में रहकर पदों को सिशोभित किया

सिद्धार्थ तोमर इंस्पेक्टर से पुलिस क्षेत्राधिकारी 2016 में बने तथा अमेठी व बहराइच इसमें बतौर सीओ तैनात रहे उसके बाद जनपद मुजफ्फरनगर में आगमन होने पर इनको पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर के पद पर तैनाती दी गई यह सर्किल बहुत ही चुनौतीपूर्ण एवं व्यापक माना जाता है इस पद पर इन से पूर्व मोहम्मद रिजवान अहमद बेहतरीन कार्य प्रणाली का नमूना पेश कर रहे थे तथा प्रत्येक कार्य को एक अनुसंधान की बातें करते थे अब सिद्धार्थ तोमर के आने के बाद शांति सद्भावना और सौहार्द की दिशा में कई मीटिंग का आयोजन हुआ तथा चुनाव के दृष्टिगत आमजन से शांतिपूर्वक चुनाव की अपील की गई तथा क्षेत्र में शांति पूर्वक चुनाव सकुशल संपन्न हो सका इसके लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर सिद्धार्थ तोमर ने कहीं कोई कसर बाकी नहीं रखी यदि उनकी कार्यशैली की बात करें तो इनसे मिलने के लिए एक समय मैं मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट तथा जांबाज पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी पहचान रखने वाले दया नायक सुवम इन से मिलने लखनऊ दो बार आए तथा इन की पीठ थपथपाई और शाबाशी देकर इनका मनोबल बढ़ाया था यह वही सिद्धार्थ तोमर है जो अपनी कार्यशैली के लिए चौकी इंचार्ज से लेकर आज सी ओ तक के पद पर काफी मशहूर एवं लोकप्रिय हैं एक मुलाकात में बेनकाब अपराधी समाचार के संपादक तस्लीम अहमद के साथ एक वार्ता में उन्होंने बताया कि क्रॉस केस की परंपरा को वह सही नहीं मानते जो मुकदमा दर्ज किया जाता है उसी में अच्छे ढंग से विवेचना की जाए तो सारा सच सामने आ जाता है तो उन्होंने यह भी कहा कि अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा तथा उन्हीं के अंदाज में जवाब देना पुलिस बखूबी जानती है पुलिस पब्लिक रिलेशन पर उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जिन्हें आपस में परस्पर एक दूसरे के सहयोग की भावना से काम करना होता है पुलिस का सूचना वाहक जनता ही है जनता ही उसे सारी अच्छी सूचनाएं उपलब्ध कराती है तथा पुलिस फिर जनता के सामने अपने अच्छे वर्क और परफॉर्मेंस रखती है उन्होंने अपने सर्किल के सभी थाना प्रभारियों को स्पस्ट हिदायत दे रखी है की पूरी निष्पक्ष और ईमानदारी के साथ काम किया जाए तथा पीड़ित के साथ हर हाल में इंसाफ हो।

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