उत्तर_भारत_मे_छाया_धूल_का_गुब्बार

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सतीश सेठी /ब्यूरोचीफ /सहारनपुर /सनसनीसुराग न्यूज़

#उत्तर_भारत_मे_छाया_धूल_का_गुब्बार:-

कल से उत्तर भारत के कई इलाकों में धूल की मोटी परत बनी हुई है। जो दिन बढ़ने के साथ गहराने लगती है। सूरज की रोशनी धरती की सतह तक नही पहुँच पा रही है। आँधी के जैसा माहौल बना हुआ है। क्योंकि उत्तर, मध्य, दक्षिण भारत मे कोई भी सक्रिय प्रणाली नही बनी हुई है जो मॉनसूनी हवाओ के रुख को बदल सके।
कुछ दिन पहले मध्य भारत पर बना कम दबाव का क्षेत्र अब बिहार पर चला गया है। जो अरब सागर की हवाओ को अपनी तरफ खींच रहा था। लेकिन अब ऐसा कुछ नही हो रहा है।
अरब सागर पर से नमी युक्त तेज़ हवाए ( 30km/h से 60km/h) गुजरात और पाकिस्तान के सिंध से होकर थार रेगिस्तान में दाखिल हो रही है।

इस साल पिछले 1 महीने से थार रेगिस्तान में बारिश नही हुई है। जिसके कारण मिट्टी सुख चुकी है। और जब 50km/h की रफ्तार वाली हवाए जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, नागौर पर से गुजरती है तो इन इलाकों की रेगिस्तान मिट्टी यानी बालू मिट्टी बारिश न होने के कारण सुख चुकी मिट्टी को हवा में मिला रही है।

( बालू मिट्टी जो कि सबसे हल्की मिट्टी होती है। इसके कण काफी महीन होते हैं जो हवाओ के छोटे से झोंके से ही वातावरण में घुल जाते हैं। और जब तेज़ हवाए निरतंर उन क्षेत्र पर गुजरे तब बड़े पैमाने पर धूल का गुब्बार हवा में मिलने लगता है। जो कि निरतंर एक-समान बहने वाली हवाओ से मिलकर बड़े भू-भाग पर फैल जाती है जैसा अब उत्तर भारत मे दिखाई दे रहा है।)

मिट्टी के हवा में मिलने से धूल की मोटी परत वातावरण में जमने लगी है।
पश्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम धुँधला हो चुका है।
कई जगहों में आसमान से रेत तक भी बरस रही है। जहाँ इन हवाओं का जोर सबसे ज्यादा है। जिनमे जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर, नागोर और चूरू शामिल हैं।

आगे भी राहत की आसार नहीं है। क्योंकि पश्चिमी राजस्थान में बारिश नही होगी। जिससे ये मौसम अगले एक हफ्ते तक बना रह सकता है।

अगर उत्तर भारत मे कही भी बारिश भी हो जाती है, जैसे आज पुर्वी पंजाब और उत्तर हरियाणा में भारी बारिश हुई, लेकिन इन इलाकों में भी यही मौसम बना हुआ है। क्योंकि बारिश इस समस्या का हल नही है। जब तक हवाओ के रुख में बदलाव नही आएगा। तब तक कुछ ऐसा ही मंज़र दिखाई देता रहेगा।

इस मौसम से वातावरण ज्यादा गर्म भी हो चुका है। क्योंकि वातावरण में रेत के कण मौजूद है। और जब सूर्य की किरण इन कणों पर पड़ती है तो रेत जल्दी गर्म होती है जिससे वातावरण भी गर्म होने लगता है। धरती से निकलने वाली गर्मी भी ऊपर नही जा पा रही है। क्योकि धूल की मोटी परत नमी को ऊपर नही उठने दे रही है।
यही कारण है कि कई जगहों पर बारिश होने के बाद भी लोगो को गर्मी और उमस से राहत नही मिल रही है।

लेकिन 14 या 15 जुलाई से धीरे धीरे हवाए बदलनी शुरू हो जाएगी। हिमालय की तलहटी में बनी ट्रफ भी दक्षिणवर्ती होना शुरू हो जाएगी। जो साथ मे बारिश भी लाएगी। बारिश की शुरुआत उत्तर से होगी, जो दक्षिण की तरफ बढ़ेगी।

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